चाय (TEA):
आधुनिक विज्ञान के हिसाब से दोनों चाय और कॉफी अल्कोहल मुक्त, स्वादयुक्त पेय पदार्थ हैं। जिन्हें पीना बिलकुल सुरक्षित है। जी हाँ, इस पे काफी स्टडीज हुई है। हारवरड मेडिकल स्कुल अमेरिका में 2022 में पाच लाख लोगों पें 11 साल तक उन्होंने नजर रखी थी। 85% लोगों ने कहा की, रोजाना चाय पिते थे और चाय पिने वाले में से 89% ने कहा की वो ब्लॅक टी पीते थे। उन में पाया गया कि जो लोग चाय और कॅाफी पीते थे उनमें समय से पहले मौत का खतरा 13% कम और दिल की बिमारीया भी कम थी। स्टीज में चाय और कॉफी के फायदों को ही दर्शाया है। ब्लैक टी, ग्रीन टी आदि चाय की सभी प्रकार में बड़ी मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। जिससे इम्युनिटी बढ़ती है, टाइप 2 डायबिटीज और दिल का दौरा पड़ने का कम जोखिम होता है। चाय में इजीसीजी(egcg) होता है। जो चर्बी की कोशिका को घटाने में मदद करता है। यहां ग्रीन टी की बात करणी जरूरी है। वैसे तो ग्रीन टी को कंपिनयों द्वारा मार्केट तो ऐसे किया जाता है, जैसे कोई बहुत ही खास वज़न घटाने वाला ड्रिंक है। लेकिन जब असल में ग्रीन टी किण्वित(ferment) किया जाता है, तो साधारण चाय पत्ती बन जाती है। किण्वित के वजह से काली चाय में एंटीऑक्सीडेंट्स और इसीजीसी मात्रा ग्रीन टी से थोडी कम होती है और कोई फरक नहीं है।कॅाफी (COFFEE):
कॅाफी की बात करें, तो स्वीट्जरलैंड के डब्लू एच ऑ (WHO) रिसर्च के मुताबिक कॅाफी अलग-अलग कैंन्सर, डायबिटीज, अल्जाइमर रोग और पार्किंसंस जैसे रोगों से बचाव करने में मदद करती है। हालांकी आधुनिक विज्ञान का यह भी कहना है की अगर ज्यादा मात्रा में चाय और कॉफी पिया जाए, तो इसके नुकसान भी उठाने पड सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकी इन दोनों में ही कैफिन और टैनिन जैसे पदार्थ पाए जाते हैं। कॉफी में कैफिन ज्यादा होता है। जब की चाय में टैनिन अधिक होता है। टैनिन शरीर में आयरन की अवशोषण(absorb) में रूकावट डालता है, जिससे एनीमिया हो सकता है। टैनिन से दांतों का रंग भी पिला पडता है। कैफिन एक उत्तेजक पदार्थ है। जो हड्डियों से कैल्शियम को कम करता है और एकदम से हृदय दर और रक्तदाब बढ़ाता है। कैफिन मूल रूप से एक हल्का नशा (mild drug) है। जो आपको तुरंत एनर्जी देता है और फिर अचानक से कमजोर कर देता है। ऊपर से लत लगाने वाला भी है। एक बार अगर कैफिन की आदत पड जाए, तो फिर इसके बिना काम चलाना मुश्किल हो जाता है। यही कारण है। आपने सुना होगा लोगों को कहते हुऎ की यार, जब तक मैं सुबह कॉफी ना पी लूं मुझसे बात मत किया करो। मैं बिना कॉफी तो काम नहीं कर सकता।रेगुलर कॅाफी और ग्रीन कॅाफी(REGULAR COFFEE VS GREEN COFFEE):
यहां एक बार रेगुलर कॉफी को ग्रीन कॉफी से तुलना करते हैं। ग्रीन कॉफी और कुछ नहीं बस ग्रीन टी के सफलता को दोहरा ने की कोशिश है। ग्रीन टी को बस भुना नही जाता, जिस वजह से इस में क्लोरोजेनिक एसिड की मात्रा रेगुलर कॅाफी से थोडी ज्यादा होती है। तो ग्रीन टी तरह ग्रीन कॅाफी के थोडे ज्यादा फायदे तो है। लेकिन दुष्प्रभाव भी उतने ही है अगर ज्यादा मात्रा पी जाए।कितनी मात्रा में चाय और कॅाफी पीए(HOW MUCH TEA AND COFFEE IS OKAY TO DRINK):
ज्यादा मात्रा किसे कहेंगे? आप सोच रहे होंगे। आधुनिक विज्ञान हारवर्ड मेडिकल स्कुल के रिसर्च के हिसाब से चाय और कॅाफी के ज्यादातर लोगों को कोई दुष्प्रभाव नहीं होंगे। अगर वो दिन में चार कप तक कॅाफी पीते है। लेकिन इससे पहले की चाय पीने लग जाए यह बातें जानना जरूरी है। अगर आपको सुबह उठते ही चाय और कॅाफी पीने की आदत है, तो फिर थोडी समस्या है। आधुनिक विज्ञान के हिसाब से चाय और कॅाफी का फायदा तभी होता है। जब वह खाने के तीस मिनट बाद पीया जाए, नाश्ता या दोपहर के खाने के बाद। शाम 05:00 बजे के बाद चाय या कॅाफी को ना पीना ही बेहतर है। वरना रात को नींद परेशान कर सकती है। तो मेडिकल आधुनिक विज्ञान स्पष्ट है की दोनों चाय और कॅाफी सेहतमंद है। जब तक आप इन्हें सीमित मात्रा में पीए। चीनी कितनी डालते है। इस बात का ध्यान रखे और खाली पेट ना पीए। कॅाफी में कैफिन ज्यादा होता है। इसलिए यह चाय से ज्यादा आदत डालने वाली होती है।आयुर्वेद के अनुसार चाय और कॅाफी का क्या कहना है?(WHAT DOES AYURVEDA SAY ABOUT TEA AND COFFEE?)
आयुर्वेद का एक सरल सिद्धांत है। अगर कोई खाद्य पदार्थ आपके घर के 100 किलोमीटर के दायरे में नहीं उगाई जाती। तो वो खाद्य पदार्थ आपकी दैनिक आहार का हिस्सा नहीं होनी चाहिए। ज्यादातर भारतीय राज्यों के आसपास चाय और कॉफी की खेती नहीं होती। आयुर्वेद के अनुसार चाय और कॉफी दोनों ही बहुत शुष्क और शरीर में गर्मी बढ़ाने वाले पदार्थ हैं। चाय और कॉफी की इस शुष्कन गुण को संतुलन करने के लिए। भारत में इसे बड़ी चालाकी से दूध में मिलाकर दिया जाता है। आयुर्वेद के हिसाब से चाय और कॉफी एसिडिक हैं और इसके लगातार सेवन से पाचन में दिक्कत, हैयर फॅाल और सफेद बालों की समस्याएं आ सकती है। आयुर्वेद के हिसाब से चाय और कॉफी तभी पीनी चाहिए, जब कफ दोष बढा हो। आसान शब्दों में कहूँ तो अगर आपको सर्दी जुकाम हो, अगर आपकी ऑयली त्वचा हो, शरीर ठंडा रहता हो, साइनस की समस्या हो। तब आपको चाय और कॉफी एक औषध की तरह पीनी चाहिए। आयुर्वेद कहता है की कॅाफी में कैफिन और चाय में टैनिन की मात्रा होने की वजह से यह उत्तेजक पदार्थ को रोज उपयोग नहीं करना चाहिए। हालांकी आयुर्वेद के पास एक बेहतर विकल्प है। जो एल्कलाइन है, ब्लड सुगर को संतुलन करता है और दिल के लिए एक दवा की तरह काम करता है। यह है अर्जुन चाय। अर्जुन वृक्ष की छाल से बनायी जाने वाली यह औषधीय के बेसुमार फायदे तो है ही। लेकिन कोई दुष्प्रभाव नही। सबसे अच्छी बात यह है की इसे आप साधारण चाय की तरह बना सकते है। यही सही मायने में भारतीय चाय है और पत्ता है इसे सुबह उठकर खाली पेट पी सकते है। बहूत आसानी से मिल भी जाती है। तो आयुर्वेद के हिसाब से चाय और कॉफी अपने शरीर के वात, पित्त और कफ को देखते हूए। कुछ ही समस्याएं में औषधी के तौर पे इस्तेमाल की जानी चाहिए। अर्जुन चाय एक बेहतर विकल्प है जो सभी के लिए सुरक्षित है।मेरा क्या कहना है चाय और कॅाफी के बारे में? (MY PERSPECTIVE):
सच में चाय और कॅाफी आज इतने महत्वपूर्ण हो चुकी हैं हमारे लिए की इन्हें ना पीए है, यह तो खयाल भी नहीं आता। लेकिन जरा सोचिए, अगर आप ऐसी अवस्था में हैं की चाय और कॉफी के बिना काम नहीं कर सकते तो क्या गड़बड़ नहीं है? क्या यह लत नहीं है? क्या हम हेल्थ को टेस्ट से ऊपर नहीं रख सकते? बिल्कुल में यह नहीं कह रहा की आप एकदम से ही इन्हें पीना बंद कर दे। वह तो सही नही होगा। लेकिन हां हम चाय और कॉफी को धीरे-धीरे दुसरी चीजे लेना सुरू कर सकते हैं। कुछ ऐसे बढ़िया विकल्प हैं जो मकसद भी पूरा करें। लेकिन हमारी हेल्थ को नुकसान भी ना पहुंचाए।चाय और कॅाफी के स्वस्थ विकल्प (HEALTHY ALTERNATIVES TO TEA AND COFFEE):
(i)अर्जुन चाय(ARJUN TEA):अर्जुन चाय सचमुच बढ़िया है। मैंने इसे दूध और बिना दूध दोनों के ही ट्राई किया और मुझे अच्छी लगी। आप भी एक बार जरूर ट्राय करके देखें।
(ii)तुलसी की चाय (TULSI TEA):
कभी-कभी मैं एक औषधीय चाय बना लेता हूं। तुलसी, अदरक, काली मिर्च, लौंग को उबाल के। मिठे के तौर पे मैं शहद डालता हूं। बहुत ही बेहतर और टेस्टी लगती है।
(iii)हॅाट चोकलेट (HOT CHOCOLATE):
हॉट चॉकलेट भी एक काफी अच्छा विकल्प है। गर्म दूध में आधा चम्मच अनस्विटन कोको पाउडर का मिक्स कर दे। मैग्नेशियम होने की वजह से आपको तुरंत एनर्जी बूस्ट भी मिलेगा। व्यक्तिगत रुप से मैं चाय और कॉफी की जगह किसी भी दिन हॅाट चॅाकलेट ले सकता हू। बिना कोई टेस्ट और असर पे समझौता किए हूए।
(iv)गरम पानी (HOT WATER):
कभी-कभी ऐसे ही गरम पीने का मन करता है। ऐसे में सिर्फ गरम पानी भी बहूत बढिया काम करता है। ऑफिस में आसनी से मिल भी जाता है।
कैफ़ीन-मुक्त पिएं(DRINK DECAFF):
दोस्तों मेरी बात एकदम साफ है अगर आप मानसिक और शारीरिक हेल्थ पर बिल्कुल भी समझौता नही करना चाहते, तो चाय और कॅाफी जैसी उत्तेजक पेय पदार्थ से थोडा दूर रहे। हेल्दीयर विकल्प की तरफ जाए। लेकिन अगर चाय और कॅाफी एक ड्रिंक से कही ज्यादा है। फिर तो कोइ कारण नहीं बनता की आप बिना कैफ़ीन वाली ना कॉफ़ी पिएं। 97% कम कैफिन होने के वजह से टेस्ट लगभग एक जैसा है। लेकिन बहुत कम आदत डालने वाला। यह निश्चित रूप से रूखापन और गर्मी पैदा करता है, लेकिन फिर भी यह रेगुलर कॅाफी विकल्प से बहूत बेहतर है। हाँ, जभी चाय बनाए उसमें गुड़ पाउडर और धागा मिश्री से मीठा करें। यह एल्कलाइन है। जैसे चाय-कॅाफी का एसिडिक असर कुछ हद तक बेअसर होगा और चीनी से भी आप दुर रहेंगे। सिर्फ टेस्ट या टेस्ट के साथ हेल्थ भी। यह आपकी पसंद है।दोस्तों यह पोस्ट आपको सहयोगी लगी हो तो कृपया हमारे स्वदेशी माहिती ब्लॅाग को फॅालो जरुर करे। शुक्रिया।
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