श्री राजीव दिक्षीतजी एक राष्ट्रवादी ....विदेशी कंपनी के छक्के उडाने वाला एक योद्धा ....✊

 श्री राजीव दिक्षीतजी एक राष्ट्रवादी ....विदेशी कंपनी के छक्के  उडाने वाला एक योद्धा ....✊


 नमस्कार दोस्तो, मै आप सभी को श्री राजीव दिक्षीतजी के बारे मे बताना चाहता हू ।  आज जिस हस्ती के बारे मे आज बात करना चाहता हू उसकी मृत्यू हूवी या हत्या .... ? अगर आप इंटरनेट ढूंढेगे तो शेकडो थेरीस मिल जायेगी । 

नमस्कार साथियों, मैं आपका दोस्त, लेखक, आज जीस हस्ती की मैं बात करने जा रहा हूँ उनकी मृत्यु हुई की हत्या हुई यदि आप यूट्यूब ढूंढेंगे यदि आप इंटरनेट ढूंढेंगे तो सैकड़ों कॉन्स्पिरेसी की थ्योरीज मिलेंगी ।  इंटरनेट पे सबसे ज्यादा सर्च किया जाने वाला, आयूर्वेद के महाविशेषज्ञानी वह नाम सिर्फ एक है राजीव दीक्षित, राजीव दीक्षित और राजीव दीक्षित आजादी बचाओ आंदोलन के प्रणेता, भारत स्वाभिमान आंदोलन के प्रणेता, हेल्थ के विषाद मेन्सीज़ के खिलाफ़ आग उगलने वाले योद्धा सरकार को हिलाकर रख देने वाले सिस्टम को हिलाकर रख देने वाले प्रहरी । हमारे देश में ये जो राजनैतिक पार्टियां हैं ना ये पार्टियां नहीं है डाकुओं के गिरोह है ये पॉलिटिक्स की गहरी समझ वो भी इन्टरनैशनल पॉलिटिक्स की गहरी समझ रखने वाले विशेषज्ञ ।



एक साल में सत्ताईस करोड़ खर्च करके राष्ट्रपती, और यहाँ एक आदमी को एक दिन में खर्च करने को बीस रुपए ना मिले । राष्ट्रपती को एक दिन में खर्च करने को साढ़े सात लाख रुपए मिले ये कौनसा देश चला रहे हैं हम,किस उपमासे नवाजे हम राजीव दीक्षित को क्योंकि जितनी भी उपमाएं होंगी इस व्यक्ति के लिए कम है ।  इस व्यक्ति के जीवन पर आगे बात करे उसे पहले एक क्षण के लिए इन का एजुकेशन जानना जरूरी है यूपी में नोवा नाम के विलेज में इनका जन्म हुआ उसके बाद मे इन्होने फिरोज़ाबाद में अपना पूरा स्कूली एजुकेशन अपने पिता के गाइडेंस में किया फिर ये इलाहाबाद चले गए अल्लाहाबाद में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इन्होने बी टेक किया उसके बाद इन्होंने आइआइटी कानपुर से एमटेक किया उसके बाद इन्होने फ्रान्स से पीएचडी किया पीएचडी । प्रश्न हैं? इतना एजुकेशन करने के बाद आदमी को एक बड़ा साइअन्टिस्ट बनके शानदार लाखों डॉलर की सैलरी लेकर दुनिया के किसी बड़े इन्स्टिट्यूशन में वक्त बिताना चाहिए रोज़ शाम को कॉकटेल पार्टीज़ करनी चाहिए बड़ी महंगी लग्जरी गाड़ियों में घूमना चाहिए, आलीशान बंगले बनाना चाहिए और प्लेनो में बिज़नेस क्लास में घूमना चाहिए, हाई फाई लाइफ होनी चाहिए ।


लेकिन ये तो योगी थे मॉडर्न योगी और ये अपना एक कुर्ता नीचे एक जीन्स या पायजामा और साइड में एक झोला निकाल के एक मॉडर्न महात्मा की तरह निकल पड़ते हैं और निकल क्या पड़ते ? जीस जगह ये खड़े होते हैं उस जगह ओपन हॉल या ऑडिटोरियम बन जाता और बड़े बड़े लोगों की तुलना में ज्यादा भीड़ इनके लिए जुड़ जाती। यह जब ग्लोबलाइज़ेशन है लिबरलाइजेशन, वैट, डब्ल्यूटीओ जैसी चीजों की बात करते हैं तो ऐसा लगता की विश्व का कोई बड़ा इकोनॉमिस्ट बोल रहे हो और मजे की बात ये है इनसे अक्सर बहस करने का साहस कोई नहीं करता था और इतने साधारण एकदम हम्बल व्यक्ति एकदम नियमित जीवन शैली, कभी बीमार नहीं पड़ना, कभी कुछ टेढ़ा मेढ़ा नहीं खाना कहीं रुतबा नहीं दिखाना, कई वीआईपी स्टेटस नहीं मांगना तो साथियो  प्रश्न ये उठता है कि राजीव दीक्षित ने ऐसा क्या किया कि उनकी मृत्यु के बाद इतनी कॉन्सपिरेसी थ्योरी रही । राजीव दीक्षित ने मल्टीनेशनल्स को हिला दिया ? इंडिया से ऐसा हिला दिया की उनको समझ ही नहीं आया की क्या करें साइअन्टिस्ट सुनीता नारायण के साथ मिलके जाने कितनी ऐसी चीज़ प्रूफ कर दी जिसका जवाब देना इनके लिए मुश्किल हो गया और यहाँ तक कहते हैं इनकी वजह से  इन्डिया में कोल्डड्रिंक्स की सेल में भयंकर  गिरावट आए यहाँ तक की इन्होने कोल्ड ड्रिंक को टॉयलेट क्लीनर और पेस्टिसाइड का दर्जा दे दिया है और ऐसे व्यक्ति से कोई परेशान क्यों नहीं हो जो कंपनी के पीछे हाथ धोकर पड़ जाये और लाखों करोड़ों की जनता उसके पीछे चले ? इन्होंने कुछ लोगों के लिए विख्यात तो कुछ लोगों के लिए कुख्यात एनरोन कंपनी पर महाराष्ट्र में कोर्ट में केस जीता और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट से भी फेवरेबल जजमेंट लिया। 


राजीव दीक्षित का पहला कथन था अडॉप्ट आयुर्वेदा वो कहते थे, भारतीय चिकित्सा शास्त्र इतना धनी है हमारे अपने खेत में, हमारे अपने आंगन में इतने किस्म की जड़ी बूटियां पेड़ पौधे उगते हैं जिनसे इंसान का पूरा शरीर ठीक हो ना तो छोड़िए ठीक हो ना तो कयुर में चला गया इंसान के शरीर में कोई बीमारी ना हो इतना प्रिवेन्शन किया जा सकता है और उसी सिद्धांत की बदौलत बीस साल तक राजीव दीक्षित को एक दिन बुखार भी नहीं हुआ । वो कहते थे एलोपैथिक कम्पनीज़ अपने फायदे के लिए बीमारियों का भी निर्माण कर रही है उनका भय पैदा कर रही है उसके बाद वो आपको इलाज बेच रही है और जो इलाज चंद पैसों में होना चाहिए उसको वो बहुत महंगे में बेच रही है और जो इलाज वो बेच रही है उस इलाज से फिर नयी बीमारियाँ पैदा हो जाती है और फिर अगली बीमारी का भी इलाज वही बेचते हैं उनका मानना था हर एलोपैथी दवा जो किसी बीमारी को दबाती है वो दस बीमारी को और जन्म देती हैं उनका कहना था, पूरी एलोपैथी क्योर पर आधारित है पूरा भारतीय चिकित्सा विज्ञान प्रिवेन्शन पर आधारित है यदि हम भारतीय चिकित्सा विज्ञान पर चलते रहेंगे तो एलोपैथी एक रुपया की दवा हिंदुस्तान में नहीं बिकेगी और दुनिया की सबसे बड़ी आबादी में से एक देश को ऐलोपैथिक कंपनियां खोना नहीं चाहती उन्होंने सारा जीवन का अडॉप्ट आयुर्वेदा  निरोगी रहिये है स्वस्थ्य रहिये और मज़े की बात वो सारा देश घूम घूम के दवाईयां देते थे। 

जहाँ उनके भाषण होते थे बाहर भी दवाइयों का एक स्टॉल लगा रहता था जहाँ पर कभी कभी लागत से भी कम मूल्य पे और कभी कभी तो फ्री में दवाइयाँ मिलते थे राजीव दीक्षित का दूसरा सबसे बड़ा नारा जिससे सारी दुनिया हिल गई यूज़ स्वदेशी, स्वदेशी आन्दोलन, भारत बचाओ आंदोलन, स्वाभिमान आंदोलन ये जीतने आंदोलन थे ये एक चीज़ पे फोकस करते थे इंडियन खाओ इंडियन पहनो । ये मानते थे इंडिया में हर गांव एक शहर है, एक शहर एक राष्ट्र है। हर घर अपने आप में एक देश है क्योंकि इंडिया का घर ऐसा घर होता है, जहाँ पर एक महिला चरखेपे सूत काट के अपना कपड़ा बुन सकती है । जहाँ पर उसी के खेत में फसल बोके उस फसल को वह साल भर खा सकता है जहाँ पर वो चार गाय पालता है और चार गाय के दूध, दही, घी, पनीर से वो अपने आप को हेल्दी रख सकता है उनका कहना था की, वेस्टर्न लोग कभी इंडिया का मुकाबला कर ही नहीं सकते क्योंकि वो अलग अलग चीजों के लिए अलग अलग पे आधारित है वो अपनी मिट्टी का लेप कर सकता है पूरी बॉडी में और मिट्टी का लेप करके आज फॉरेन कन्ट्रीज में मड बाथ के नाम पे जो सैकड़ों डॉलर में ट्रीटमेंट दिया जाता है, वो हमारा इंडियन मड बाथ अपने खेत की मिट्टी से ले सकता है । हमारा इंडियन सुबह पांच बजे उठ कर अपने खेत में अपनी बैलगाड़ी में अपने बैल को जोत के अपने खेत में हल चला सकता है और शाम तक वो इतना थक जायेगा की उसको किसी स्लीपिंग टेबलेट की जरूरत नहीं पड़ेगी । इसीलिए इंडियन हिस्टरी में पहले डिप्रेशन ये सब बीमारियाँ देखी नहीं गई उनका कहना था कि धीरे धीरे करके वेस्टर्न इकोनॉमी इंडियन इकोनॉमीसको वेस्टर्ना इस करने का कुचक्र रच रही है ताकी इंडयन सेल्फ सस्टेनेबिलिटी का जो मॉडल है इस सिद्धांत से बाहर निकल के वो हम पर आश्रित हो जाए इसके कुचक्र के खिलाफ़ राजीव दीक्षित ने आंदोलन छेड़ा । राजीव दीक्षित ने कहा यूज़ साइंस वाइसली डोंट फॉलो वेस्टर्न कल्चर ब्लाइंडली राजीव दीक्षित के अनुसार साइंस लोकल रिक्वायमेंट से जन्म लेता है उनका कहना था, पहनावा वेस्टर्न कन्ट्रीज में ठंड बहुत ज्यादा पड़ती है, आधे से ज्यादा जगहों पर इसलिए उनके पहनावे में सूट है इंडिया में आधे से ज्यादा जगह पर गर्मी पड़ती है इसके लिए हमारे पहनावे में पतले पतले कॉटन के कुरते है धोतियां है पैजामे है, जिससे अंदर बाहर आराम से हवा जा सके।

उनका सोचना था इंडिया को टीवी बीवी जैसी टेक्नोलॉजीज़ की जरूरत नहीं है । टीवी तो इंसान को मंदबुद्धि बनता है, टीवी तो इंसान को बाहरी दुनिया से काटता है आप सिर्फ टीवी देखते रहते है, उस समय ना आपको फिजिकल श्रम करते है ना किसी और से बात करते है। उसके विपरीत इंडिया में कल्चर क्या था ? गुरुओं के साथ बैठकें स्पिराच्यूलिटी शिखना, परिवार के साथ बैठ के जोइन फैमिली का मज़ा लेना रात को कोई दादा की सेवा कर रहा है, कोई दादी की सेवा कर रहा है, कोई बच्चो को बहार घूमाने ले जा रहा है ये इंडिया ऐसा था । जिसमें स्वस्थ्य रहने के पूरे इन्टरनल जुगाड़ थे । राजीव दीक्षित का मानना था, ब्लाइंडली वेस्टर्न कल्चर को फॉलो करके ये टीवी के माध्यम से धीरे धीरे धीरे धीरे ये हमारे रडार में, हमारी मेंटैलिटी में, हमारे सब कॉन्शस माइंड में ऐसी चीजों की जरूरत पैदा कर देंगे, जो हमारे देश के लिए अनुकूल नहीं साइनस के नाम पर ये हम लोगों को धीरे धीरे अपाहिज बना देंगे राजीव दीक्षित का मानना था उतना ही साइनस यूज़ कीजिए जितना आपके लोकल इकोसिस्टम को आवश्यकता हो दुनिया के हर कोने को एक दूसरे के साइंस की कोई भी आवश्यकता नहीं है । 

 || हमारी प्रशिक्षण प्रणाली गुरुकुल है ||

राजीव दीक्षित के शिक्षा पर भी क्रांतिकारी विचार थे उनका ये मानना था इंडिया में गुरुकुल परंपरा होती थी, जिसमें कुछ समय के लिए घरवाले अपने बच्चों को गुरुकुल में भेजते थे यहाँ तक की राजा,महाराजा भी भेजते थे। वहाँ गुरुकूल में गुरु की सेवा से लेके, जानवरों की सेवा से लेके, युद्ध कला  से लेके,स्पिरिचूऐलिटी ज्ञान से लेके, फिजिकल एक्सरसाइज से लेके हर चीज़ गुरुकुल में सीखा दिया जाता था ।इन्डिया व्यापारियों का देश था नौकरी, पेशा लोगों का देश नहीं था, इंडिया बिज़नेस होवनर्स का देश था, आज हमारे घरों के बच्चे सेफ जॉब करना चाहते हैं, एक बड़ा पैकेज लेके चुपचाप बैठना चाहते हैं और फ्राइडे सैटरडे संडे को पार्टी करना चाहते हैं।पांच दिन का वर्क कल्चर चाहते हैं ये इंडिया नहीं था क्या ऐसा बवाल करने वाले व्यक्ति को मारना नहीं चाहेंगे। तो साथियों, राजीव दीक्षित को क्या कहेंगे ? आप स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कहे, आप उनको समाज सुधाराक कहेंगे, आप उसको देशप्रेमी कहेंगे, आप उसको मॉडर्न  योगीजी कहेंगे, मैं आपसे कहना चाहता हूँ इतनी यंग एज में इतना सारा लिटरेचर लिखने वाला बिना किसी भय के बड़ी से बड़ी कंपनी के खिलाफ़ ताल ठोक देने वाला, अकेले योद्धा की तरह निकल पड़ने वाला टोटली समाज में विश्वास रखने वाला टोटली सेवा में विश्वास रखने वाला, कभी एक चिकित्सक की तरह निशुल्क दवाइयां देने वाला, कभी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की तरह आव्हान करने वाला, कभी वैज्ञानिक की तरह विश्व भर के लाइब्रेरीज़ में घूम घूम के रिसर्च मटीरियल निकाल के कम्पनीज़ में केस करने वाला, एक जीवन में पच्चास जीवन जीने वाले व्यक्ति का नाम है राजीव दीक्षित। मैं इन्टरनेट पे उठ रहे हैं उन सैकड़ों प्रश्नों से सहमत हूँ क्यों मीडिया ने राजीव दीक्षित की डेथ को हाइलाइट नहीं किया ? क्याें मीडिया ने राजीव दीक्षित पर कवर स्टोरी नहीं चलायी क्यों किसी ने उनके विचारों पे कड़ी प्रकाशित नहीं की ? शायद इसलिए क्योंकि बहुत सारी एमएनसी से जो विज्ञापन आते है, वो विज्ञापन बंद हो जाएंगे इसलिए राजीव दीक्षित की मृत्यु जिन हालातों में हुई मैं कोई गुप्तचर नहीं हूँ मैं कोई फॉरेन्सिक एक्स्पर्ट नहीं हूँ जो कमेंट कर सकूँ मैं इन्टरनेट की बातें कह रहा हूँ जो वाइड ली पब्लिक डोमेन में अवेलेबल है राजीव दीक्षित की मृत्यु जिन संदेहास्पद हालातों में हुई, वैसे ही हालात उनको मीडिया में प्रॉपर कवरेज ना मिलने का भी कारण थे। 

मैं देशभर में राजीव दीक्षित के प्रशंसकों से आज यह अपील करता हूँ, राजीव दीक्षित को जिंदा रखीये साल में अनेक बार राजीव दीक्षित के विचारों पर आधारित अनेक पब्लिकेशन करवाईये, कहीं ना कहीं कोई राजीव दीक्षित संग्रहालय बनवाई ये, जिससे राजीव दीक्षित के विचार जिंदा रहे और आने वाली नई पीढ़ियां जो बड़ी बड़ी डिग्रियां हासिल करके सिर्फ सेफ जोब का सपना देखती है, वो इससे प्रेरणा ले और ये सोचें हमें भी अपने देश के लिए करना है। राजीव दीक्षित के विचारों का पालन किया जाए, उनके विचारों का सम्मान किया जाए, उनके विचारों को जिंदा रखा जाए और ब्लाइन्ड वेस्टर्न कल्चर से बाहर निकल के हम भारतीयता का सम्मान करना शुरू करे ।इंडयन बोलने पे हमको शर्म नहीं आनी चाहिए इंडियन बोलने पे हम को गर्व होना चाहिए गर्व ! शुक्रिया धन्यवाद थैंक यू !

जय हिंद !

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